Monday, May 5, 2014

शब्द- कुछ कहे कुछ अनकहे

शब्दों के जादू को जानना आसन नही,

जिसने भी जाना है इसे उसने कभी खुद को कहा विद्वान नही,

अपनी भी कहानी की सुरुवात हुई थी इन्ही शब्दों से,

कभी शब्द था कभी मै और कभी वो,

सोते जागते,उठते बैटते,चलते फिरते हमेसा शब्दों से ही घिरा रहता था,

कुछ मेरे तो कुछ उसके शब्द थे.

जी भी रहा था उन्ही शब्दों के सहारे,

बिना कुछ सोचे समझे या विचरे,चल रह था भाग रहा था दोर रहा था ,

पुल व् बांध रहा थे ढेरो सपनों के आज के तो कुछ कल के,

फिर एक दिन एक सैलाब आया इन्ही शब्दों का और एक ही पल में बिखर गये सारे शब्द.

कुछ अनकहे शब्द अनकहे ही रह गये,

शब्दों से बना संसार पता नही कन्हा खो गया,

मैंने भी छोर दिया,भुला दिया उन शादो को शब्दों के हवाले छोर के चल परा,

बढ़ा जिनगी के रहो में बहुत सारा शब्दों को अनसुना कर के,

किन्तु क्या करू बंधू शब्द तो शब्द हैं,

अजर अमर और सर्वोपरी हैं ये शब्द,

हमेसा आस पास ही रहते हैं कभी तो हंसा देते है तो कवी रुला देते हैं,

तभी तो कहते हैं अगर शब्दों का साथ छूता तो जिन्दगी भी साथ छोर देती है,

शब्द हैं तो जिन्दगी है चाहे वो बिन कहे शब्द ही क्यूँ न हो,

- कुमार अंकित 

Tuesday, January 22, 2013

बीते क्ल को भुला दूँ या आने वाले कल को सजा दूँ .....

यूँ तो मे कोई महान सख्श नही जो आप मेरे यदा को एक जीविनी के तरह पढ़े ...
किन्तु
ये जरुर कह सकता हूँ की मेरी यादे उन लाखो यादो से जुदा है और भाहूत ही अलग सा अनोखा...
मेरे कल मुझे हर पल मुझे आने वाल्ला कल को अच्चा करने का न्योता देते हैं,
कहते है तू कल में झांक और देख अपने कल को ...
याद कर अपने कल को....
सोच ले अपने कल को ....
और फिर कुछ कर ले अपने आने वाले कल के लिए...
कुछ भी कर ,,,
अच्छा कर ,,,,
हो सके तो हजारो कल को सवारने की कोसिस कर...
एक भी कल को तू स्वर पये तवी तेरा जीवन जीने लायक होगा
खुशियों से भरा कल,
हँसता और हंसाता हुआ कल,
सूरज के रोशनी में चमकता हुआ कल,
चांदनी से दमकता हुआ कल,
सजा हुआ सा ,
आने वाला कल!
दो रस्ते है
मेरे पास और आपके पास भी ,
या तो भुला दूँ बीते हुए कल को
या फिर सजा दूँ आने वाले कल को !!




Friday, January 18, 2013

मेरे शहर "कटिहार " की एक झलक. . . ;

जब भी आप उतरी बिहार में रेल से सफर कर रहे हो और किसी रेलवे स्टेशन के पहले आपको खेतो खाल्यानो के बाद दूर एक लम्बा सा अकेले टीवी टावर दिखे या फ्लोवर मिल का गुम्बज समझ लेना आ गया "कटिहार"...

पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित कटिहार भारत के बिहार प्रान्त का एक जिला है। पूर्व समय में यह जिला पूर्णिया जिले का एक हिस्सा था। इसका इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। इस जिले का नाम इसके प्रमुख शहर दीघी-कटिहार के नाम पर रखा गया था। मुगल शासन के अधीन इस जिले की स्थापना सरकार तेजपुर ने की थी। 13वीं शताब्दी के आरम्भ में यहाँ पर मोहम्मद्दीन शासकों ने राज किया। 1770 ई. में जब मोहम्मद अली खान पूर्णिया के गर्वनर थे, उस समय यह जिला ब्रिटिशों के हाथ में चला गया। अत: काफी लम्बे समय तक इस जगह पर कई शासनों ने राज किया। अत: 2 अक्टूबर 1973 ई. को स्वतंत्र जिले के रूप में घोषित कर दिया गयाकटिहार

शहर कटिहार के कुछ मुख्य स्थान हैं :




इन्सभी खूबियों के साथ हमारे कटिहार की सबसे बरी बात है हम बहु मिश्रित समाज में विश्वासी हैं बेदभाव और प्रान्त विस्सेस धर्नाये,आतंकवाद से लाखो दूर सभी का दिल खोल के स्वागत करते हैं.हमारे सम्माज में एकजुट हो कर जीवनयापन करने की गुण बहुत  ही पावन है.
हमलोग दसहरा,छट,दिवाली,कृष्णाअस्र्त्मी, गुरुपूर्णिमा बारे धूमधाम से मानते हैं इससे आप हमारे वेबसाइट पे देख सकते हैं!
तानिक्की और विज्ञानं में हम पीछे हैं कितु हम विकास के एक्चुक हैं और बिकास की और अग्रसर !!!


वैसे तो बहुत कुछ है बताने को मेरे शहर कटिहार के बारे में शेष मिलने पर बताऊंगा :)


आपका स्वागत है :आगमन मार्ग 
वायु मार्ग: यहाँ का सबसे निकटतम हवाई अड्डा बागडोग्रा हवाई अड्डा है।
रेल मार्ग: कटिहार में रेलवे स्‍टेशन कटिहार रेलमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। पूर्वोतर के राज्‍यों में आवागमन का प्रमुख रेल मार्ग बरौनी-कटिहार-गौहाटी ही है।
सड़क मार्ग: भारत के कई प्रमुख शहरों से कटिहार सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। एनएच-31 इस जिले तक पहुंचने का सुलभ राजमार्ग है।


Tuesday, January 15, 2013

महंगा गिफ्ट दो किन्तु वादा कभी नही..

एक बात कहना आपसे कभी भी किसी को बिना सोचे गिफ्ट में वादा मत करना
बहुत दर्द मिलेगा और वो भी लाइलाज दर्द,,,
वो एक वादा जो देते समय तो सस्ता लगेगा बाद में बहुत महंगा,
हंसी और कुशी के मौके पे ये गिफ्ट माँगा जाता है जो दुःख के सिवा कुछ नही

हाँ मैंने दिया था एक वादा गिफ्ट में एक इन्सान को,
भूल बैठा था को गलती कर रहा हूँ
ये गिफ्ट सस्ता सा लगा और सासन भी था देंना
मुझे क्या पता था की गलती कर दी मैंने
गिफ्ट दिए वो भी वादा का गिफ्ट

अब आलम ये है की ना पीछे हाट सकता हूँ
और वादा निभाता हूँ तो तील तील मरता हूँ
ना मिल ही सकता हूँ और ना ही जुद्दा हो सकता हूँ
और न ही खुस ही हो सकता हूँ और न ही खफा ,

सामने न हो तो भुलाना आसन होता है
किन्तु रोज मिल मिल के भी दूर रहना बहुत मुस्किल होता है
एक पल में किया था वादा निभाना के लिया
कैसे तोर दूँ खुद को बचने के लिए...

इसलिए दोस्तों,सज्जनों आपको बता रहा हूँ
महंगा गिफ्ट देना किन्तु वादा कभी मत देंना!!





Monday, January 14, 2013

सबसे महंगा पतंग उराया इस मकर्श्नक्रंती में

आप सभी ने मकर संक्रांति मनाया,
सभी अपने घरो के सदस्य के साथ समय गुजरा और आन्दिंत हुए,
मेरी शुभकामना है आप सवी यूँ ही खुस रहे और चारो और सिर्फ ख़ुशी ही ख़ुशी हो,
आज मैंने भी कुछ ख़ुशी के काम किये जिसमे से एक था पतंग उरना था
मैंने अपने छोटे दोस्तों को पटाया सोचा फ्री में एन्जॉय कर लूँ
किन्तु बाद में पता चला की वो सोच मांगी पर गयी,
वो छोटे दोस्त देखने में छोटे थे कितु क्या कहूँ एक न. के सैतान
लूट ही लिया मुझे खर्चा करवा करवा के,
बच्चो को छोटा समझने की गलती आप भी मत करना !!!